अगर आप भी अपनी स्कॉलरशिप, पीएम किसान निजि , या गैस सब्सिडी का इंतज़ार कर रहे हैं?अगर आप बैंक जाते हैं,तो आपका खाता एकदम एक्टिव है, लेन-देन भी हो रहा है लेकिन फिर भी सरकारी योजना का पैसा आपके अकाउंट में नहीं पहुँच रहा है।
मेरे पास ज्योति नाम की लड़की आई और बोली की मेरे बैंक खाते में सरकारी योजना के पैसे नहीं आ रहे है और मै लवकुश पिछले 4 साल से csc सेंटर चला रहा हूँ मेने सला देते हुये बताया कि आप भी अपनी स्कॉलरशिप, पीएम किसान निधि, या गैस सब्सिडी का इंतज़ार कर रहे हैं? आप बैंक जाते हैं, आपका खाता एकदम एक्टिव है, लेन-देन भी हो रहा है
लेकिन फिर भी सरकारी योजना का पैसा आपके अकाउंट में नहीं पहुँच रहा है।यह स्थिति बहुत निराशाजनक होती है। अक्सर लोग बैंक कर्मचारियों से पूछते हैं, तो वे कह देते हैं कि “आपका आधार लिंक है, पैसा आ जाएगा।” लेकिन पैसा फिर भी नहीं आता।
यह सला बड़ा भाई के रूप में वित्तीय जानकार मैं आपको बता दूँ कि समस्या आपके “Bank Account” में नहीं, बल्कि एक तकनीकी प्रक्रिया में होती है जबकि जिसे बैंक वाले अक्सर विस्तार से नहीं समझाते। यह समस्या है “Aadhar Linking” और “DBT Seeding” के बीच के अंतर को न समझना।

क्या है “Aadhar Linking”? (सिर्फ पहचान का जरिया)
जब आप अपना बैंक अकाउंट खुलवाते हैं या KYC अपडेट करवाते हैं, तो आप अपना आधार कार्ड बैंक को देते हैं। बैंक आपके आधार नंबर को आपके खाते से जोड़ देता है। इसे “Aadhar Linking” कहते हैं।
- इसका क्या काम है? यह सिर्फ बैंक को यह बताने के लिए है कि आप कौन हैं (KYC के लिए)।
- क्या इससे सरकारी पैसा आता है? ज़रूरी नहीं। आपके एक ही आधार से 4-5 अलग-अलग बैंकों में खाते लिंक हो सकते हैं।
क्या है “DBT Seeding”? (पैसे आने का रास्ता)
सरकार अब ज़्यादातर योजनाओं का पैसा सीधे लाभार्थी के खाते में भेजती है, जिसे Direct Benefit Transfer (DBT) कहते हैं। सरकार यह पैसा अकाउंट नंबर से नहीं, बल्कि आधार नंबर के ज़रिए भेजती है और पैसा सीधेभेजने का यही तरीका है |
यहाँ सबसे बड़ा खेल है सरकार का सिस्टम (NPCI सर्वर) पैसे भेजने से पहले यह चेक करता है कि आपका आधार नंबर किस बैंक खाते के साथ “Seeded” या “Mapped” है।
- DBT Seeding का मतलब: यह NPCI (National Payments Corporation of India) के सर्वर पर एक तरह का “Lock” लगाना है। आप बैंक को यह लिखित सहमति देते हैं कि “सरकार से आने वाला मेरा सारा DBT का पैसा सिर्फ और सिर्फ इसी वाले बैंक खाते में डाला जाए।”
- महत्वपूर्ण नियम: आप अपना आधार कई बैंकों से “Link” कर सकते हैं, लेकिन DBT के लिए उसे सिर्फ एक ही बैंक खाते में “Seed” किया जा सकता है।
पैसा क्यों अटकता है?
यही सबसे बड़ी गलतफहमी है। लोग सोचते हैं कि उन्होंने बैंक में आधार दे दिया है (यानी Aadhar Linking हो गई है), तो पैसा आ जाएगा। जबकि सच्चाई यह है कि उनका खाता NPCI सर्वर पर DBT के लिए Seed नहीं हुआ है।
अगर आपका खाता चालू है और फिर भी पैसा नहीं आ रहा, तो 99% संभावना है कि आपकी DBT Seeding पेंडिंग है।
अगर खाता फ्रीज़ हो तो?
कभी-कभी समस्या DBT की नहीं, बल्कि खाते की स्थिति की होती है। अगर आपने लंबे समय से अपने खाते में कोई लेन-देन नहीं किया है, तो बैंक सुरक्षा कारणों से उसे ‘Inoperative’ या ‘Dormant’ कर देता है। ऐसी स्थिति में भी सरकारी पैसा वापस लौट जाता है।
अगर आपको शक है कि आपका खाता बंद हो गया है, तो आपको सबसे पहले उसे दोबारा चालू करवाना होगा। इसके लिए आपको बैंक मैनेजर को एक account unfreeze application in hindi लिखकर देनी होगी, जिसके साथ आपको अपने KYC दस्तावेज़ (आधार और पैन कार्ड) दोबारा जमा करने होंगे। खाता अनफ्रीज होने के बाद ही DBT की प्रक्रिया काम करेगी।
समाधान: अब आपको क्या करना है?
अगर आपका खाता चालू है लेकिन पैसा नहीं आया, तो इन स्टेप्स को फॉलो करें:
- अपनी बैंक शाखा में जाएँ।
- बैंक अधिकारी से यह न कहें कि “आधार लिंक करना है।”
- साफ़ शब्दों में कहें: “मुझे अपना खाता NPCI में DBT के लिए मैपिंग (Seeding) करवाना है ताकि सरकारी पैसा आ सके।”
- इसके लिए बैंक में एक अलग से फॉर्म होता है (जिसे अक्सर Aadhaar Seeding Consent Form कहते हैं)। उसे भरें और जमा करें।
निष्कर्ष
याद रखें, Aadhar Linking सिर्फ बैंक के रिकॉर्ड के लिए है, जबकि DBT Seeding सरकारी पैसे को आपके खाते तक पहुँचाने का रास्ता है। अगली बार जब बैंक जाएँ, तो सही सवाल पूछें और सुनिश्चित करें कि आपका खाता डीबीटी के लिए सीडेड है, न कि सिर्फ लिंक।