NEET-UG 2025 की काउंसलिंग प्रक्रिया अपने अंतिम चरण — स्ट्रे वैकेंसी राउंड — तक पहुँच चुकी है। यह वह दौर होता है जब सभी रेगुलर राउंड खत्म हो जाते हैं, फिर भी हजारों सीटें खाली रह जाती हैं।
लेकिन यह “आखिरी मौका” अब हर साल बड़ा और चर्चित होता जा रहा है। सवाल यह है की क्या यह एक अपवाद है या भारत के मेडिकल एडमिशन सिस्टम की नई वास्तविकता बन रहा है?
स्ट्रे वैकेंसी राउंड क्या है?
NEET UG काउंसलिंग में स्ट्रे वैकेंसी राउंड वह चरण है जिसमें वे सीटें भरी जाती हैं जो पहले के राउंड (AIQ, State Quota, Mop-up) के बाद भी खाली रह जाती हैं।
इसमें छात्र केवल उन कॉलेजों में आवेदन कर सकते हैं जहाँ सीटें रिक्त हैं, और चयन की प्रक्रिया भी त्वरित होती है।
कई बार यह प्रक्रिया ‘लास्ट-मिनिट एडमिशन रेस’ में बदल जाती है — जहाँ छात्र और संस्थान दोनों सीट भरने के लिए तेजी से निर्णय लेते हैं।
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आखिर क्यों | हर साल बढ़ रही है स्ट्रे वैकेंसी सीटें
1. संस्थानों की संख्या बढ़ी, लेकिन समन्वय नहीं
पिछले कुछ वर्षों में देशभर में निजी मेडिकल कॉलेजों और नए सरकारी संस्थानों की संख्या बढ़ी है।
लेकिन कई कॉलेजों की काउंसलिंग प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं हो पाती — जिससे सीटें अंत में खाली रह जाती हैं।
उदाहरण के तौर पर, 2024 में कुल 1,10,000 से अधिक MBBS सीटों में से लगभग 2,000 सीटें स्ट्रे वैकेंसी तक पहुँचीं।
2. उम्मीदवारों का “डुअल रजिस्ट्रेशन”
कई छात्र राज्य और ऑल-इंडिया दोनों काउंसलिंग में आवेदन करते हैं। जब उन्हें एक जगह प्रवेश मिल जाता है, तो दूसरी जगह सीट छोड़ देते हैं — जिससे वहाँ सीट खाली रह जाती है।
3. उच्च फीस और प्राइवेट कॉलेजों की अनिच्छा
कुछ प्राइवेट कॉलेजों में MBBS फीस 60–80 लाख तक पहुँच चुकी है।
इससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्र अंतिम चरण तक भी दाखिला नहीं ले पाते, और सीटें खाली रह जाती हैं।
4. सिस्टम-जनित देरी और अस्पष्टता
काउंसलिंग पोर्टल पर तकनीकी गड़बड़ियाँ, लेट नोटिफिकेशन, और अस्पष्ट नियम भी उम्मीदवारों को उलझा देते हैं।
कई छात्र समय पर डॉक्यूमेंट अपलोड नहीं कर पाते, जिससे उनका मौका खत्म हो जाता है।
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स्ट्रे वैकेंसी राउंड का असर — छात्रों पर, कॉलेजों पर और सिस्टम पर
छात्रों पर असर
- यह चरण अक्सर “अंतिम उम्मीद” बन जाता है, जहाँ छात्र बिना ज्यादा विकल्पों के सिर्फ उपलब्ध सीटें चुन पाते हैं।
- ग्रामीण या दूरदराज़ के छात्रों को सूचना देर से मिलने के कारण भागीदारी कठिन हो जाती है।
- काउंसलिंग के इस राउंड में पारदर्शिता की कमी की शिकायतें बढ़ रही हैं — कुछ छात्रों का कहना है कि “सीटें पहले से तय कर दी जाती हैं”।
कॉलेजों पर असर
- कॉलेजों के लिए यह “सीट भरने का दबाव” होता है, क्योंकि अगर सीटें खाली रह जाएँ तो आर्थिक नुकसान होता है।
- कई संस्थान इस राउंड में फीस बढ़ाने या शर्तें सख्त करने लगते हैं।
- कुछ निजी कॉलेज इस मौके का उपयोग “मैनेजमेंट कोटा” के रूप में करते हैं, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठता है।
शिक्षा-प्रणाली पर असर
- यह संकेत देता है कि देश के मेडिकल एडमिशन सिस्टम में अभी भी योजना और समन्वय की कमी है।
- काउंसलिंग का समय-निर्धारण, तकनीकी पारदर्शिता और राज्य-केंद्र तालमेल में सुधार की आवश्यकता है।
- भविष्य में यदि यह प्रवृत्ति जारी रही, तो NEET काउंसलिंग का “स्ट्रे वैकेंसी राउंड” स्थायी चरण बन सकता है।
क्या यह छात्रों के लिए अवसर है या सिस्टम की कमजोरी?
अवसर की दृष्टि से
- जो छात्र पहले राउंड में पीछे रह गए थे, उनके लिए यह “लास्ट-मिनिट विंडो” है।
- कुछ कॉलेज इस चरण में फीस कम कर देते हैं या स्कॉलरशिप विकल्प देते हैं।
- कई छात्रों को सरकारी कॉलेजों में अप्रत्याशित मौके मिल जाते हैं।
कमजोरी की दृष्टि से
- अगर हर साल हजारों सीटें स्ट्रे वैकेंसी तक पहुँचें, तो यह सिस्टम की विफलता दर्शाता है।
- यह दिखाता है कि काउंसलिंग में समय, पारदर्शिता और सूचना वितरण में खामियाँ हैं।
- लंबे समय में इससे मेडिकल शिक्षा की विश्वसनीयता पर असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों की राय
शिक्षा नीति विशेषज्ञों का मानना है कि स्ट्रे वैकेंसी राउंड की बढ़ती संख्या दोहरी तस्वीर पेश करती है —
“यह छात्रों के लिए दूसरा मौका है, लेकिन सिस्टम के लिए चेतावनी। हर सीट खाली रहना उस मेडिकल सीट की बर्बादी है जो किसी योग्य छात्र को मिल सकती थी।”
एक अन्य मेडिकल काउंसलिंग कोऑर्डिनेटर ने कहा,
“अगर काउंसलिंग का डेटा इंटीग्रेट किया जाए और टेक्नोलॉजी-बेस्ड एल्गोरिद्म अपनाया जाए, तो 90% सीटें मुख्य राउंड में ही भर सकती हैं।”
निष्कर्ष
स्ट्रे वैकेंसी राउंड का बढ़ता चलन यह संकेत दे रहा है कि भारत की मेडिकल एडमिशन प्रक्रिया को अब री-इंजीनियरिंग की आवश्यकता है।
यह सिर्फ खाली सीटों की समस्या नहीं, बल्कि नीति, पारदर्शिता और डिजिटल पहुंच की चुनौती भी है।
भविष्य में अगर काउंसलिंग सिस्टम को एकीकृत, पारदर्शी और छात्र-अनुकूल बनाया गया, तो शायद “स्ट्रे वैकेंसी राउंड” को “आपातकालीन विकल्प” की बजाय “अवसर का प्रतीक” माना जाएगा